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लखनऊ में ब्‍लैक फंगस का प्रकोप, केजीएमयू में इतने मरीजों का चल रहा इलाज

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बीच अब ब्‍लैक फंगस (Black Fungus) ने राजधानी में तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया है। इसकी चपेट में आने अब त​क केजीएमयू में उपचार करा रहे चार मरीजों की मौत हो चुकी है। अन्य तीन रोगी भर्ती हैं। छह रोगियों की सर्जरी हो चुकी है।

ब्‍लैक फंगस

ब्‍लैक फंगस का लखनऊ में प्रकोप

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) से मिली जानकारी के अनुसार समाचार लिखे जाने तक कुल 34 मरीजों का इलाज चल रहा है। जिन लोगों की मौत हुई है उनमें तीन महिला एवं एक पुरुष है। मरने वाले रायबरेली, हरदोई, अयोध्या और लखीमपुर के निवासी हैं।

लखनऊ में मरीज 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को अब ब्‍लैक फंगस (Black Fungus) से बचने के लिए जागरुक किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ब्लैक फंगस के रोज तीन से चार मरीज आ रहे हैं। लखनऊ में केजीएमयू में 34, लोहिया संस्थान में तीन और सिप्स में पांच मरीज भर्ती हैं।

ब्लैक फंगस के लक्षण

लखनऊ के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति इस ​बीमारी की चपेट में है तो उसके चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं। ये सभी इसके लक्षण मिलेंगे।

उनका कहना है कि ये इंफेक्शन उन लोगों को होता है जो डायबिटिज हैं। जिन्हें कैंसर है, जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ हो, जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हों, जिन्हें कोई स्किन इंजरी हो, प्रिमेच्योर बेबी को भी ये हो सकता है। कमजोर इम्यूनिटी सिस्टम वालों में भी ब्लैक फंगस इंफेक्शन फैलने की आशंका और ज्यादा हो जाती है।

ब्‍लैक फंगस (Black Fungus) से बचाव

चिकित्सक का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान यह संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अगर ब्‍लैक फंगस (Black Fungus) से बचना है तो निर्माणाधीन कार्य स्थल और धूल वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए। साथ ही बेवजह घर से बाहर निकलने से बचें। जरूरी काम होने पर मॉस्क और चश्मा लगाकर ही बाहर निकले।

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ऐसे शरीर में पहुंचता है फंगस

फंगस से बचने के लिए हमें शुद्ध वातावरण में रहना चाहिये। वातावरण में मौजूद ये फंगस हमारे श्वास के जरिये शरीर में प्रवेश कर देते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का कटा फटा है या घाव हो तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैलने की संभावना रहती है। अगर इसे शुरुआती दौर में पहचान नहीं की गई, तो जानलेवा साबित भी हो सकती है।

डॉक्टरों की सलाह से लें दवाएं

चिकित्सक कहना है कि हम छोटी-छोटी बीमारियों में डॉक्टर के पास न जाकर मेडिकल स्टोर से दवाएं ले लेते हैं। लेकिन इसे हमें नजरअंदाज करना चहिये और शरीर में अगर ब्लैक फंगस के लक्षण दिखे तो सबसे पहले डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच कराएं। डॉक्टरों की सलाह के हिसाब से दवा लें।

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