What is NATO in Hindi : जानिए नाटो कैसे बना रूस-यूक्रेन युद्ध का कारण

What Is NATO in Hindi : रूस और यूक्रेन के बीच भयानक जंग चल रही है। रूस ने यूक्रेन पर कई मिसाइल भी दागे हैं। वहीं यूक्रेन ने भी कई मौकों पर रूस को जवाब दिया है। लेकिन रूस अब काफी आक्रामक दिख रहा है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि रूस को इतने सख्त कदम उठाने पड़े। इसके पीछे का मुख्य कारण NATO को बताया जा रहा है। आखिर नाटो क्या है? (What Is NATO in Hindi) आज के इस लेख में हम आपको नाटो से जुडी हर एक बात साझा करेंगे, जो आपको जरूर जानना चाहिए।

What Is NATO

नाटो क्या है – What Is NATO in Hindi

NATO यानी North Atlantic Treaty Organization (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) (NATO Full Form in Hindi) जोकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप का एक संयुक्त राजनीतिक और सैन्य संगठन है। यह संगठन 1949 में स्थापित किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही इस संगठन का मुख्य लक्ष्य सोवियत संघ पर अपना प्रभाव बढ़ाना था और सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को कम करना था।

वहीं अमेरिका ने नाटो का इस्तेमाल (What Is NATO in Hindi) यूरोप में राष्ट्रवादी सिद्धांतों की रक्षा के लिए भी किया। इसके पीछे यूरोपीय महाद्वीप में राजनीतिक एकता को कायम रखना अमेरिका का मुख्‍य उद्देश्‍य था।

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नाटो का दूसरा नाम अटलांटिक एलायंस (NATO Second Name) भी है। इस आधार पर एक देश अपनी सेना को दूसरे देश में भेजता है, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण दिया जाता है और साथ ही किसी भी स्थिति से सख्ती से निपटने के आदेश जारी किए जाते हैं। बता दें कि नाटो में अब तक कुल 30 देश शामिल हैं।

नाटो का मुख्यालय – Where is NATO Headquarter

NATO का मुख्यालय यानी Headquarter ‘बेल्जियम’ की राजधानी ‘ब्रसेल्स’ में है।

नाटो का इतिहास – NATO History in Hindi

साल 1947 में नाटो की शुरूआत फ्रांस और ब्रिटेन के बीच हुई एक संधि से हुई थी। इस संधि को डनकिर्क संधि के नाम से जाना जाता था। द्वितीय विश्‍वयुद्ध के बाद जर्मनी की तरफ से हमले की संभावना को देखते हुए ये संधि की गई थी। इसके बाद साल 1949 में जब औपचारिक रूप से नाटो की स्‍थापना हुई तब इसके 12 संस्‍थापक सदस्‍य थे। इसमें अमेरिका, बेल्जियम, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, डेनमार्क, इटली, लक्जमबुर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, पुर्तगाल और आइसलैंड शामिल (NATO Founders) थे।

नाटो के सदस्य देश – NATO Countries in Hindi

इसके बाद शीत युद्ध से पहले नाटो में स्पेन, पश्चिम जर्मनी, टर्की और यूनान भी शामिल हो गए। शीत युद्ध खत्म होने के बाद इसमें हंगरी, पोलैंड और चेक रिपब्लिक भी शामिल हो गए। इसके बाद फिर साल 2004 में नाटो को 7 और देशों ने ज्वाइन किया। वहीं अगर आज की बात करें तो इसमें अब तक कुल 30 सदस्य देश (NATO Countries List) शामिल हैं।

नाटो का मुख्य उद्देश्य – NATO Main Purpose in Hindi

नाटो मुख्य रूप से संयुक्‍त सुरक्षा नीति पर काम (NATO Main Purpose in Hindi) करता है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई बाहरी देश नाटो के किसी सदस्य देश पर हमला करता है तो नाटो में शामिल अन्य सभी सदस्य देश सैन्य और राजनीतिक रूप से उस देश की रक्षा करेंगे।

साझा सुरक्षा को लेकर नाटो घोषणापत्र के अनुच्छेद 5 में एक सबसे महत्वपूर्ण बात निहित है। इसके अनुसार यदि उत्तरी अमेरिका या यूरोप के एक या अधिक सदस्‍यों पर हथियारों से हमला किया जाता है तो वह हमला उन सभी देशों पर माना जाएगा जो नाटो के सदस्‍य हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध का कारण – Russia Ukraine News

रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध का सबसे बड़ा कारण नाटो ही है। दरअसल यूक्रेन नाटो में शामिल होना चाहता है। इसी बात को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच गहमागहमी की शुरूआत हुई। दरअसल रूस का मानना है कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्‍य देश (Russia Ukraine News) बन जाता है तो नाटो की गतिविधियां उसकी सीमा तक पहुंच जाएंगी, जो रूस की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।

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